Sunday, March 9, 2014

किसानो की आत्म हत्याओं को रोकें ऋषि खेती अपनाएं !

The One Straw Revolution एक तिनका क्रांती

जुताई ,खाद ,दवाई ,निंदाई ,रोपाई नहीं 

धान का पुआल  ,गेंहूं या सरसों की नरवाई

से  गेंहूं ,सरसों और धान की ऋषि -खेती 



फुकुओकाजी का कहना है, 
' कि धान के पुआल से बहुत बड़े बदलाव की शुरुवाद हो सकती है.  लोगों को पुआल  बेकार नजर आता है किन्तु किसी को विश्वाश  नहीं होगा कि ये एक बहुत बड़े इंकलाब की शुरुवाद  है. मैने इस पुआल के  तिनकों के वज़न और ताकत को महसूस कर लिया है यह एक वास्तविक क्रांती है.

ये गेंहूं की फसल है इस से मुझे एक एकड़ से 40 क्विंटल तक अनाज मिल जाता है यानी एक वर्ग मीटर में एक किलो. ये पैदावार जापान के सबसे उर्वरक इलाकों की पैदावार के बराबर है या उस से भी अधिक है. जबकि इन खेतों को ३० साल से भी अधिक समय से जोता नहीं गया है.

गेंहूं की बुआई धान को काटने के कम से कम दो हफ्ते पहले जिस समय धान खेतों में खड़ी रहती है और पकने वाली रहती है में सीधे बीजों को बिखेर कर की जाती है. जब धान पक जाती है  मै धान को काट लेता हूँ तथा धान को झाड़ कर बचे पुआल को वापस खेतों पर जहाँ का तहां फैला देता हूँ.




इस पुआल के ढकाव से गेंहूं के नन्हे पौधे बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं पांव से इन पौधों को कोई नुक्सान नहीं होता है. सरसों और राई भी ठण्ड की फसल है इसकी बुआई का भी यही तरीका है. 

धान की बुआई का भी यही तरीका है खड़ी गेंहू या सरसों की फसल में या उसकी नरवाई में धान के बीजों को छिड़क दिया जाता है. फसल को काट कर उसकी नरवाई को जहाँ का तहां पनपते धान के पौधों के ऊपर छिड़क दिया जाता है.  

भारत में अधिकतर किसान धान के पुआल ,नरवाई आदी को खेतों में जला देते हैं. इस से खेत भी जल जाते हैं. गेंहूं और सरसों की नरवाई से निकलते धान के पौधे।पैदावार 40 क्विंटल /एकड़। 
धान की फसल तैयार है.
ऋषि-खेती की गुणवत्ता और उत्पादकता सबसे अधिक है।  



 किसानो की आत्म हत्याओं को रोकें ऋषि खेती अपनाएं !

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