Wednesday, May 31, 2017

सीड बॉल क्रांति



सीड बॉल क्रांति 


1999 में जापान के ख्याति प्राप्त कृषि वैज्ञानिक एवं कुदरती खेती के प्रणेता श्री स्व मस्नोबू फुकुओकाजी गाँधी आश्रम सेवाग्राम में पधारे थे। उन्हें वहां एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आमंत्रित किया था। इस की जानकारी मुझे मेरे मित्र जेकब नेलिथेनम ने दी मै  सीधे वहां पहुँच गया। जब हम वहां पहुंचे फुकुओकाजी अपनी टीम के साथ मीटिंग हाल के बाहर कुर्सी लगाकर बैठे थे उनके साथ श्री मकीनो अनुवादक ,दो लड़कियां और एक वीडियो ग्राफर भी थे। हाल के अंदर भाषण चल रहे थे जो उन्हें पसंद नहीं थे इसलिए वो बाहर पोस्टर आदि लगाकर बैठे थे। किन्तु अफ़सोस की बात उन्हें सुनने के लिए वहां कोई नहीं था।

मै और जेकब उनके पास सीढ़ियों पर बैठ गए थे। इस से 10 साल पहले वे हमारे फार्म पर पधार चुके थे। हम सन 84 -85 से कुदरती खेती का अभ्यास कर रहे थे उन्होंने हमे पहचान लिया। फिर क्या था हमारे बीच संवाद शुरू हो गया। मकीनो जी हिंदी  में अनुवाद करने लगे।  देखते देखते अनेक लोग उनकी बांतो को सुनने के लिए के लिए इकठे होने लगे भीड़ इकठा होने लगी। हाल के अंदर के लोग भी भाषण छोड़ कर बाहर आ गए।

वो बता रहे थे की पिछले अनेक सालो से वो नेचरल फार्मिंग कर रहे हैं अनेक किताबें उन्होंने लिखी हैं अनेक बार अख़बार में और मेगज़ीनो में उनके लेख छपे हैं। अभी यहां आने से पहले में तंजानिया गया था वहां पांच साल पहले भी में गया था। वहां बहुत भयंकर सूखा पड़ा था वहां बरसात होना भी बंद हो गई थी।

Image may contain: 1 person, sitting and childपहले वहां घने जंगल थे किन्तु जुताई और रसायनो पर आधारित खेती के आने से सारे जंगल नस्ट हो गए थे। खान ,पानी और पशुओं के लिए चारा भी नहीं था। गंभीर  संकट पैदा हो गया था। दुनिया भर से समाज सेवक वहां जा रहे थे पर कुछ नहीं हो रहा था। उन्होंने बताया की वो ऐसे दूर दराज  के इलाके में में गए  जहाँ पहले कोई नहीं गया था।

वहां कुछ लोग बिना जुताई करे हाथों से बीजों को गड़ा  कर खेती कर जैसे तैसे गुजर कर रहे थे।वहां उन्होंने लोगों को सीड बॉल बनाना सिखाया दुर्भाग्य से वहां क्ले मिट्टी नहीं मिली पर दीमक की मिट्टी बहुत थी उस से सीड बॉल बनाई  गयी। मरता क्या नहीं करता बच्चा बच्चा सीड बॉल बनाकर गुलेल से  सीड बाल बनाकर फेंकने लगा। जब दुबारा फुकुओका जी ५ साल बाद वहां गए तो दंग रह गए बहुत बड़ा इलाका हरियाली से ढक गया था। जहां बरसात नहीं होती थी वहां बरसात होने लगी पशुओं के लिए चारा खाने को अनाज सब उपलब्ध था।
Image may contain: 7 people, people sitting, child and indoor


फुकुओकाजी ने बताया कि "जुताई वाली खेती "के कारण पनपते रेगिस्तानों को थामने  के लिए सीड बाल सब से सरल सस्ता उपाय है। इसमें हरियाली का विज्ञान और दर्शन  छुपा है। 

2 comments:

RS DP said...

आदरणीय टाइटस जी , क्ले बल के लिए क्ले, शहरों में कहाँ से प्राप्त की जा सकती है?

Raju Titus said...

क्ले तालाबों के नीचे मिलती है गर्मियों पानी कम हो जाने पर मिलती है।