Sunday, April 26, 2015

खेत किसान बचेंगे तब ही हम भी बचेंगे।

खेत और किसान बचेंगे तब ही हम भी बचेंगे। 

र किसी को जीने के लिए आसरा चाहिए किसानो के पास खेती ही आसरा है जब वह खेती के खर्चों के कारण कर्ज में फंस जाता है और खेती से आमदनी नहीं होती है  तो वह मजबूर हो जाता है और मौत को गले लगा लेता है।
 "आत्म हत्या " कोई बच्चों का खेल नहीं है किन्तु जब कोई आत्म हत्या करता है तो यह बहुत बड़ी घटना बन जाती है। किन्तु जब एक नहीं दो नहीं लाखों किसान आत्म  हत्या करने लगें  तो यह पागल पन  नहीं किन्तु हम सब के लिए सोचने वाली घटना बन जाती है। क्योंकि हमारी रोटी ,हवा ,पानी का स्रोत हमारे खेत हैं।

इसलिए देश में खेत और किसानो के मरने का मतलब है की वह दिन दूर नहीं जब हमे रोटी ,हवा और पानी से वंचित रहना पड़ेगा। सरकार की यह जवाबदारी है की एक ओर  वह हमे रोटी ,हवा और पानी से महफूस रखे और खेत किसानो की पवरिष भी अच्छे से रखे जिस से खेत और किसान समृद्ध रहें उन्हें  कोई तकलीफ न हो किन्तु अफ़सोस की बात है की ऐसा नहीं हो पा  रहा है।

आज खेती किसानी की समस्या बड़ी गंभीर हो गयी है एक और जहाँ हर रोज कोई किसान आत्म हत्या कर रहा है वहीं बहत बड़ी तादात में किसान खेती का काम बंद कर रहे  हैं। यदि कोई गेंहूँ ,चावल आदि नहीं उगायेगा तो हम क्या खाएंगे ? सब खेत रेगिस्तान बन जायेंगे तो हवा और पानी कहाँ से आएगा ? इसका असर हर रोजगार  पर पड़ेगा स्कूल ,अस्पताल ,कारखाने कैसे चलेंगे ? पैसा तो रहेगा पर खाना नहीं मिलेगा।  यही कारण है की किसान को "अन्नदाता " कहा  जाता है।

इस समस्या  को हल करने की पूरी जवाबदारी सरकार की बनती है किन्तु इसका मतलब यह नहीं कि हम सब सरकार पर छोड़ दें हमारी भी उतनी जवाबदारी बनती है जितनी सरकार की है क्योंकि यह मसला हमारी रोजी का रोटी का मसला भी है। खेत किसान बचेंगे तब ही हम भी बचेंगे। हम पिछले कई दशकों से खेती किसानी से जुड़े हैं हमारा मानना है की आजकल जो खेती हो रही है है उसमे सुधार की जरूरत है हमे ऐसी खेती करना चाहिए जिस से खेत और किसान समृद्ध होते जाएँ उन्हें खेती छोड़ने की जरूरत नहीं रहे ,उन्हें कभी घाटा ना हो वे कभी कर्जों में न फंसे।  बिना जुताई की कुदरती खेती जिसे हम ऋषि खेती कहते हैं का यही उदेश्य है।

 कुदरत की और वापस लोटना पड़ेगा "ऋषि खेती " कुदरत की ओर  लौटने का मार्ग है। 

2 comments:

Majumdar said...

Rajuji,

In wealthy economies, less than 10% of the population is into agriculture. The suggestion that India can avoid that is utopian. Yes, if we want masses of Indians to remain at a tad over subsistence levels, yes we can keep 60% of the people on farms.

Regards

Raju Titus said...

Farming is noble ,peaceful and healthy job if done naturally.It does not require much fossil fuel.Natural clean ,water and food must be right of all citizen.