Monday, June 20, 2016

सीड बॉल (बीज गोलियां )

सीड बॉल 

क्ले से बनी बीज गोलियां 

नेचरल फार्मिंग (ऋषि -खेती ) करने का तरीका 

"बिना -जुताई ,बिना -खाद ,बिना -रसायनो ,बिना -निंदाई से होने वाली खेती "


सीड बॉल क्या है ?





बीजों को जब क्ले मिटटी की परत से १/२ इंच से लेकर १ इंच तक की गोल गोल गोलियां से सुरक्षित कर लिया जाता है उसे सीड बॉल कहते हैं।

सीड बॉल का क्या उपयोग है ?



सीड बाल का उपयोग बिना जुताई ,बिना जहरीले रसायनों और बिना गोबर के कुदरती खेती करने और मरुस्थलों को हरियाली में बदलने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
जुताई से क्या नुक्सान है ?
जुताई करने से बरसात का पानी जमीन के अंदर नहीं जाता है वह तेजी से बहता है।   खेतकी खाद /मिट्टी को बहा कर ले जाता है इस कारण खेत कमजोर हो जाते हैं। सूखा और  बाढ़ का यही मूल कारण है।

क्ले क्या है ?

क्ले मिटटी है जो मिटटी के बर्तन और मूर्ती आदि को बनने में उपयोग में लाई जाती है। जो तालाब की तलहटी ,नदी ,नालों के किनारे जमा पाई जाती है।

तालाब की चिकनी मिट्टी (क्ले )
क्ले की क्या खूबी है ?

 यह सर्वोत्तम खाद होती है। यह बहुत महीन ,चिकनी होती है।  इसकी गोली बहुत  कड़क मजबूत बनती है।  जिसे चूहा ,चिड़िया तोड़ नहीं सकता है। इसमें बीज पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है। इस मिट्टी में असंख्य जमीन को उर्वरता और नमी प्रदान करने वाले सूख्स्म जीवाणु रहते हैं। इसके एक कण  को  सूख्स्म दर्शी यंत्र से देखने पर इसमें सूख्स्म जीवाणुओं आलावा निर्जीव कुछ भी नहीं रहता है।
बरसात के लिए सूखी क्ले पाउडर जमा कल लेना चाहिए।  सीड बॉल को हमेशा सूखा कर ही डालना चाहिए अनेक बार देखा गया है की गीली सीड बॉल को आसानी से चूहे आदि तोड़ लेते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो गर्मियों में सीड बॉल बना कर सूखा कर रख लेना चाहिए या खेत में बिखरा देना चाहिए। गीली सीड बाल को चूहों से बचाने के लिए ओपरी सतह पर लाल मिर्च की कोटिंग करने से वो सुरक्षित हो जाती हैं।

क्ले की क्या पहचान है ? 

जब हम इस मिटटी की बनी सूखी या गीली गोली को पानी में डालते हैं यह दूसरी मिटटी की तरह बिखरती नहीं है।

क्ले से बनी सीड बॉल का क्या फायदा है ?

यह गोली आम जंगली बीजों की तरह जमीन पर पड़ी रहती है बरसात या अनुकूल मौसम आने पर ऊग आती है।
क्ले की जैविकता तेजी से पनप कर नन्हे पौधे को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान कर देती है। जिस से बंपर उत्पादन मिलता है।


सीड बॉल की खोज किसने की है ?

सीड बॉल की खोज जापान के सूख्स्म जीवाणु विशेषज्ञ स्व. मसनोबु फुकुोकजी ने की है वे अनेको साल इस से बिना जुताई की कुदरती खेती करते रहे हैं।  उनकी पैदावार आधुनिक वैज्ञानिक खेती से बहुत अधिक उत्पादकता और गुवत्तावत्ता  वाली पाई  गयी है।  इसके आलावा जहां वैज्ञानिक  खेती से फसले  ,मिटटी ,पानी और हवा में जहर घुलता है, और सूखा पड़ता है । कुदरती खेती में इसके विपरीत परिणाम आते हैं।  जमीन उर्वरक, पानीदार और हरयाली से भर जाती है।

भारत में इस तकनीक से कौन खेती कर रहा है ?

भारत में अनेक लोग इस विधि से खेती करते है किन्तु हमने इसे सबसे पहले अपनाया है इसलिए भारत  में यह इस विधि का प्रणेता फार्म के रूप में जाना जाता है। हम इसे ऋषि खेती के नाम से करते हैं।
टाइटस फार्म होशंगाबाद म.प्र. पेड़ों और खरपतवारों के साथ
 चावल की खेती 

सीडबाल से फसलों को उगाने में क्या फायदा है ?

इसमें लागत और श्रम बहुत  कम हो जाता है। इसे कोई भी महिला या बच्चा कर सकता है। फसल और खेत की गुणवत्ता में हर साल इजाफा होते जाता है। बरसात का पानी खेत के द्वारा सोख लिया जाता है।भूमि छरण ,जैव -विविधताओं का छरण रुक जाता है। मरुस्थल हरियाली में तब्दील हो जाते हैं।  कुदरती फसलों का सेवन करने से कैंसर जैसी बीमारी भी ठीक हो जाती है।फसलों का स्वाद बहुत बढ़ जाता है।

जुताई नहीं करने से नींदों की समस्या आएगी उसके लिए क्या करना है ?

हर वनस्पति जो कुदरत उगाती है वह काम की रहती है। उसे मारने से वह उग्र रूप धारण  कर लेती है नहीं मारने से वह नियंत्रित हो जाती है और फसलों की दोस्त बन जाती है।  कोई भी वनस्पति कुछ लेती नहीं है वरन देती है। भूमि सुधार के लिए खरपतवारों का होना जरूरी है। खरपतवारों के ढकाव में असंख्य जीव जंतु ,कीड़े ,मकोड़े ,केंचुए आदि रहते हैं जिनके निवास से भूमि की उर्वरता और नमी में जबरदस्त इजाफा होता है। किसी भी प्रकार की खाद की जरूरत नहीं रहती है।

क्ले के साथ यदि हम यूरिया और गोबर को मिला दें तो ताकत और बढ़ जाएगी या नहीं ?

क्ले को कुदरत ने बनाया है यूरिया और गोबर की खाद मानव निर्मित है जो कुदरत बनाती है वह मानव नहीं बना सकता है। इसलिए ताकत कम हो जाती है।

फसलों पर जब बीमारिया आती है तो क्या करते हैं ?

जुताई करने से जुती बखरी बारीक मिटटी कीचड़ में तब्दील हो जाती है इसलिए बरसात का पानी खेत के द्वारा
सोखा नहीं जाता है वह तेजी से बहता है अपने साथ खेत की खाद को भी बहा कर ले जाता है। इसलिए खेत कमजोर हो जाते हैं ,कमजोर खेत में कमजोर फसलें पैदा होती है। इसलिए बीमारियां लग जाती है। दवाइयों के उपयोग से बीमारियां बहुत बढ़ जाती है जैसे कैंसर किन्तु जुताई नहीं करने के कारण खेत ताकतवर हो जाते है उनमे ताकतवर फसलें पैदा होती है। इसलिए रोग नहीं लगते हैं और यदि कोई रोग आता है तो वह  कुदरती ताकत से ठीक हो जाता है। नींदे भी बीमारियों रोकने में सहायक रहते हैं।

सीडबॉल से कौन कौन सी फसल/पेड़ आदि  ऊगा सकते हैं ?

सीडबाल से जंगली पेड़,अर्धजंगली पेड़ ,फलदार पेड़,चारे के पेड़ ,अनाज सब्जियां आदि सब एक साथ ऊगा सकते हैं। इस तकनीक में फसलों पर छाया का असर नहीं होता है। इस प्रकार बहुत कम जगह से बहुत अधिक
पैदावार ली जा सकती है।

क्या इस तकनीक से रेगिस्तानों को हरा भरा बनाया जा सकता है ?

फुकुोकजी ने ऐसे प्रयोग किये हैं सीड बॉल से जहां बारिश होना बंद हो गयी थी चारा और खाने को नहीं था को हरा भरा बना दिया जिस से बारिश भी होने लगी है।  वो कहते हैं यदि हमे जल्दी अपने रेगिस्तानों को हरा भरा बनाना है तो हम हवाई जहाज से सीडबाल का छिड़काव कर सकते हैं।

क्या  हम छतों पर या अपनी आँगन बाड़ी में सीडबाल का उपयोग कर सकते हैं ?

समान्यत: आंगनबाड़ी या छतों पर फसलों को उगाने के लिए मानव निर्मित खादों का उपयोग किया जाता है जिस के कारण बहुत बीमारियां आती है यदि इसमें क्ले की बनी सीड बाल का उपयोग किया जाता  है और अनेक वनस्पतियों को एक साथ उगाया जाता है तो बीमारियां नहीं लगाएंगी और हमे कुदरती आहार मिल जायेगा।


मुर्गा जाली का उपयोग करना 
सीडबाल को बड़े पैमाने पर बनाने के लिए  क्या करना चाहिए ?

गोल तगाड़ी में गोल गोल घुमा कर बनाना 


बड़े पैमाने पर हम सीड बॉल को बनाने के लिए मुर्गा जाली का इस्तमाल करते हैं। बीज और क्ले को पांवों से गूथ कर मुर्गा  जाली से उसके छोटे छोटे टुकड़े गिरा  लेते हैं  जिन्हे थोड़ा फरका  होने देते हैं फिर गोल बड़े बर्तन में  गोल गोल घुमा लेते है जिस से गोलियां बन जाती है।  और बड़े पैमाने पर हम कंक्रीट मिक्सर का उपयोग कर असंख्य गोलिया मिनटों में बना सकते है।

क्या सीड बाल को बनाना प्रतिदिन की पूजा पाठ ,व्यायाम ,योगा की तरह है ?

जी हाँ बल्कि उस से भी अच्छा है इसे हर कोई घर में प्रति दिन की गतिविधि बना सकता है यह भी पूजा पाठ ,योग और व्यायाम की तरह है।  क्ले मिटटी को हाथ लगाना बहुत अच्छी गतिविधि है इस से पूरा शरीर लाभान्वित हो जाता है। प्रतिदिन घर में आने वाली सब्जियों में बहुत बीज रहते है उन्हें इकट्ठा करके हम बीज गोलियां बनाते  रहे और सुखा  कर स्टोर कर लें जब मौसम आये तो उन्हें बगीचे में बिखरा भर देने से फसलों का उत्पादन हो जाता है।

क्ले कहां से मिलेगी ?

पुराने तालाब से जब पानी सूख जाता है, नदी ,नालों की कगार से।

सीडबाल कैसे बनाए ?

बड़े पैमाने पर सीड बाल बनाने के लिए सूखी क्ले को बारीक कर उसमे बीज मिला ले आटे की तरह पाँव से गूंथ ले फिर एक मुर्गा जाली की फ्रेम बनाकर छोटे छोटे टुकड़े काट लें फिर जब वो फर्के हो जाएँ उन्हें हाथों से गोल करले। ध्यान ये रहे की एक १/२ इंच व्यास गोली में एक दो ही बीज रहे।

छोटे पैमाने पर तो यह अच्छा रहता है की क्ले को बारीक कर आटे  की  वाली छलनी से छान  कर रख लें फिर जितने बीज हों उनके 7  भाग मिटटी को आंटे को मिलाकर गूंथ लें फिर हाथ से गोलिया बनाकर सुखा कर रखले
जब अच्छी बारिश हो जए तब उन्हें बिखरा दें एक वर्ग मीटर में करीब १० गोली का हिसाब थी रहता है। बरसात में सीधे गीली गोलियों को बिखराया जा सकता है।बहुत बड़े पैमाने पर कांक्रीट मिक्सर का भी इस्तमाल किया जाता है।
 यह भी तरीका है। --वीडियो

                                         Masanobu Fukuoka Makes Seed Balls 


चिकेन नेट से सीड बॉल बनाने की विधि 
https://picasaweb.google.com/104446847230945407735/SEEDBALLMAKINGUSINGCHIKENNET?authuser=0&feat=directlink

सीड बॉल बनाने और उगाने की सावधानियां 


१-दाल जाती के बीजों की सीड बॉल बनाते  वक्त बीज फूलने के कारण सीड बॉल फुट जाती हैं इसलिए उन्हें पानी में कुछ समय भीगा कर पहले फुला लेना चाहिए और तुरंत धूप में सुखा लेना चाहिए यदि मौसम सही है तो सीधे फेक लेने चाहिए।
२-कभी कभी ऊगते समय जब सीड बॉल से बीज अंकुरित होने लगते हैं उन्हें चींटी आदि खा लेती हैं ऐसी परिस्थिति में हम सीड बॉल बनाते समय गाजर घास की पत्तियों को पीस कर मिला देते हैं। जिस से चीटियां नहीं खाती हैं। अन्य कोई देशी स्थानीय उपाय भी किया जा सकता है।  एक बार तेज बारिश होने पर चींटी आदि नहीं रहते हैं।
३-सीड बॉल उगाते समय पिछली फसल का स्ट्रॉ बहुत सहायक रहता है।  नीचे सीड बॉल ऊपर स्ट्रॉ कवर सबसे उत्तम उपाय है।  यदि नहीं है तो ग्राउंड कवर को ऊगने देना चाहिए फिर इस कवर में सीड बॉल डाल दिया जा सकता है।
4-  बनाते समय गोली का साइज बीज के अनुसार बड़ा होना  चाहिए मसलन गोली के ऊपर बीज नहीं दिखने चाहिए और गोली चिकनी ,मजबूत बनना चाहिए।

५ -कुदरती खेती में खरपतवार कोई समस्या नहीं रहती है इसलिए सीड बॉल बनाकर डालना एक मात्र काम रह जाता है।

रबी की फसल की नरवाई से ऊगती धान की सीड बाल 

सीड बॉल के फेल हो जाने के कारण 

१- सही क्ले का नहीं होना।
२- बीजों में अंकुरण छमता नहीं रहने के कारण


३- सही मौसम का नहीं होने
४-सीड बाल की सुरक्षा में कमी यानि हरे या सूखे मल्च के ढकाव की कमी
५- सीड बॉल के दो बड़े दुश्मन है पहला कुतरकर खाने वाले जानवर जैसे चूहे,  गिलहरी  और कीड़े आदि

सीड बॉल फेल होने से कैसे बचें 


१- गोली बड़ी और गोल तथा चिकनी होना चाहिए।
२ -गोली को हवादार स्ट्रा पिछली फसल  नरवाई या पुआल से ढका होना चाहिए यदि नहीं है आपातकालीन परिस्थिति में गोली को थोड़ा डिबल  भी किया जा सकता है ,या किसी कुदरती अवरोधक जैसे गाजर घास या नीम आदि का भी उपयोग  सकता है।
३- बारीक बीजों जैसे क्लोवर ,राजगीर (Amranth ) ,गाजर घास आदि ऊगा कर हरा मल्च तैयार किया जा सकता है।
लाल मिर्ची के पाउडर से गोलियों
 का बचाव 
४- बड़े हरियाली के ढकाव  जैसे घास ,गाजर घास आदि के अंदर सीड बाल फेंक कर घास की ऊंचाई और फसल की ऊंचाई के अनुसार कतई की जा सकती है। कटे घास आदि से मल्च  बनता है  जिस से सीड बाल  की सुरक्षा हो जाती है। पिछली फसल की नरवाई /पुआल आदि गोलियों को चिडयों से बचाने में सहयोग करते हैं।
५ - स्तनधारी जैसे चूहे ,गिलहरी ,सुअर को जब पता चल जाता है की बीज गोलियों में बीज हैं तब वे गोलियों को को बहुत नुक्सान पहुंचाते हैं इन से बचाने के लिए गोलियों की ऊपरी सतह पर लाल मिर्ची के पाउडर की परत लगा देने से वो गोलियों को नुक्सान नहीं करते हैं। गोबर ,गोमूत्र बकरी। गाय भैंस किसी का भी मिलाने से भी बॉस आ जाने से सीड बाल की सुरक्षा हो जाती है।
धान की पुआल से ऊगती रबी की फसल 

सीड बॉल ही क्यों जरूरी है। 

१-जो बीज जमीन की ऊपरी सतह  से ऊगता है जहां हवा, पोषकता, नमी और पर्याप्त सूर्य की रौशनी रहती है वह शुरू से ताकतवर रहता है। इसलिए जमीन की ऊपरी सतह को खराब नहीं करना चाहिए।
२- जमीन की ऊपरी सतह हमारे पर्यावरण के संवर्धन के लिए बहुत उपयोगी रहती है।

 ३-कृषि में महनत और लागत को कम करने के लिए।
४-  हर हाथ को काम और आराम के लिए।
5- हरियाली ,गरीबी और बीमारीओं को कम करने के लिए।
6-पनपते मरुस्थलों को थामने और पुराने मरुस्थलों को हरा भरा बनाने के लिए।
७ -आत्म -निर्भरता के लिए।
नोट :-
जो किसान भाई अभी अभी जुड़े हैं और वो ऋषि खेती करना  चाहते हैं कृपया इस लेख को पढ़ कर जो सवाल बनता है उसे कर सकते हैं उसके लिए मुझे मिस्ड कॉल भी कर सकते हैं मेरा मो न 917 973 8049 है। शुरू करने के लिए खेत की सुरक्षा जरूरी है तथा कोई भी भूमि का कार्य नहीं करना है।  बॉल बनाना सीखना सबसे जरूरी है। पहले हाथों से सीड बॉल बनाये फिर मुर्गा जाली का उपयोग कर बनाये बड़े पैमाने पर हम कंक्रीट मिक्सर का उपयोग कर सीड बॉल बना सकते हैं। जहां सुरक्षा जरूरी नहीं है वहां सीधे बीज भी फेंके जा सकते हैं।  फलदार पेड़ों के लिए तैयार पेड़ भी लगाए जा सकते हैं। पशुपालन भी अपनी और खेत के पर्यावरण  के अनुसार किया जा सकता है। 
राजू टाइटस 

6 comments:

My Space said...

This is very very interesting. I don't know why this is not followed on large scale and most farmers till date continue doing commercial farming using poisonous chemicals and machines. I just can't imagine benefits of this way of farming, it could be simply revolutionary !

Theodore Bennett said...

Aloha Raju! Thank you for your posts. My first time to your blog. I am a small farmer in Hawaii slowly growing more. Aloha! Ted Bennett

Sanjay Sharma said...

Great !!

RAJENDRA SINGH RATLAM WALA said...

ज्ञानवर्धक जानकारी

K's Corner said...

Wonderful

Vipesh Garg said...

Beautiful Raju ji. You are Indian Fukuoka. Our scientists and govts are simply wants to increase the production at any cost. This has been destroyed the environment and failed to produce incomes to farmers and quality food. Through technological interventions we may have increased the production but it has created huge socio-exonomic disparities and environmental crisis.


Natural gaming or rishi kheti has huge potential to reduce the cost of cultivation with sustainability to our farmers without compromising nature and quality of food.

Raju ji people like you are actually sustaining and serving mother earth. May universe bless you all powers and strengths.