Saturday, June 11, 2016

डू नथिंग इलाज

डू नथिंग इलाज 


एन्जिल की बीमारी की कहानी 


एन्जिल मेरी नातिन जिसकी उम्र १४ साल की है अच्छे भले खेलते खेलते बुखार गया वह हमेशा की तरह चुप चाप बिस्तर में जाकर लेट गयी। उसी समय उसकी मम्मी को केरल  जाना था रिज़र्वेशन हो गया था।  'वह चिंता  करने लगी कि जाऊं कि नहीं ' मेने कहा  "बेटा चिंता करने की जरूरत नहीं है। वह हमेशा की तरह अपने आप को बुखार से ठीक कर लेगी। "
अब हमे बंदर की अक्ल से चलने की जरूरत है। 

बचपन से वह बुखार आने पर खाना  पीना छोड़ कर केवल सोती रहती है कितना भी बोला  जाये वह दवाई लेना पसंद नहीं करती है यदि कोई बुखार उतरने की गोली दी जाती भी है तो वह उलटी कर देती रही है। 104 बुखार उसको आ जाना मामूली बात है। इस लिए हमे उसके बुखार से डर लगा।

हमेशा की तरह बुखार 104 पर चढ़ कर रुक गया।  जो तीन दिन तक रहा फिर वह कम होने लगा किन्तु स्थाई नहीं था कम ज्यादह हो रहा था। इस दौरान उसने कुछ भी नहीं खाया केवल बहुत थोड़ा वह पानी बहुत मनाने पर पी लेती थी।  इसलिए हमे चिंता होने लगी।

हम शहर से दूर अपने फार्म हॉउस में रहते हैं और पिछले तीस सालो से " डू नथिंग फार्मिंग " कर रहे हैं। जो जापान के विश्व विख्यात कृषि वैज्ञानिक  स्व. श्री मस्नोबु फुकुोकजी की खोज है और दुनिया भर में कुदरती खेती के नाम से मशहूर है। भारत  में हम इसे "ऋषि खेती " कहते हैं। इस आधार पर हमे कुदरती इलाज पर भरोसा है फिर भी हम इंसान है। सलाह देना बहुत  आसान होता है किन्तु उसे अपने और अपने परिवार में अमल में लाना बहुत  कठिन होता है।

धीरे धीरे समय गुजरता गया बुखार फिर से १०३ पर पहुँच गया और हमारा धैर्य भी टूटने लगा एन्जिल भी बुखार से बहुत थक गई थी  वह भी दवाई मांगने लगी थी।  उसकी नानी रोने लगी थी और कह रही थी इसे अस्पताल ले चलो।  असल में चिंता बुखार की नहीं थी चिंता उसके बिलकुल नहीं खाने पीने की थी। वह जरूरत से अधिक कमजोर दिखने लगी थी। केरल से उसकी  माँ बार बार फोन कर एन्जिल के हाल पूछ कर चिंता और डर के मारे बेहाल हो रही थी।

बुखार के दुसरे दिन हमारे साले साहब और भाभीजी भी पधारी थीं उनका भी चिंता के मारे बुरा हाल था वह भी अस्प्ताल ले जाने की सलाह दे रहे थे। ऐसे में हमे कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो कुदरती इलाज का जानकार हो इसलिए हमने नेचर क्योर ग्रुप का सहारा लिए तुरंत ग्रुप में खबर डाल दी।

नेचर क्योर का यह अंतरास्ट्रीय ग्रुप है। इसमें खबर आते ही अनेक दोस्तों ने संपर्क कर हमारी हिम्मत को बहुत बढ़ा दिया।  सबने कहा की एन्जिल जिस तरीके से बिना कुछ खाये और पिए खूब सोकर अपने शरीर को बीमारी से लड़ने की ताकत दे रही है यही कुदरती इलाज है।  जब उसकी बीमारी ठीक हो जाएगी  वह अपने आप खाना और पीना शुरू कर देगी।

और यही हुआ आखरी रात को उसको बहुत पसीना निकला और दुसरे दिन उसका बुखार उतर गया किन्तु उसने खाना पीना नहीं शुरू किया।  यह एक और चिंता / डर  का सबब  बन गया की इतने दिनों से भूखा प्यासा  , बीमारी की हालत हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दे सकती है।  किन्तु जब हमने इस खबर को अपने ग्रुप में डाला  तो हमे मालूम हुआ की बुखार उतर जाना बीमारी के ठीक हो जाने का संकेत नहीं है जब एन्जिल को भूख लगने लगेगी वह स्वम् कुछ खाने या पीने को मंगेगी समझो को अब बीमारी ठीक हो रही है।

और इस तरीके से एन्जिल अब ठीक से खाने और पीने लगी है वह ठीक हो गई है किन्तु  उसने न केवल हमारे परिवार को वरन  हम सबको एक सबक सिखा दिया है कि जिस प्रकार "डू नथिंग " फार्मिंग है उसी प्रकार "डू नथिंग इलाज " भी है।

मित्रो एन्जिल की यह कहानी मेरे परिवार की कहानी है "डू नथिंग " इलाज हमारे देश में उपवास के नाम से बहुत प्रचलित है किन्तु इसमें भी बहुत ध्यान देने की जरूरत है इसलिए हर किसी को सलाह है कि बुखार आने पर
डरना नहीं चाहिए जहां तक सम्भव हो अपने को "रासायनिक बाजारू जहरों " से बचाने पर बल देना चाहए।

अनेक बार कहा जाता है की "नीम हकीमो और झोला छाप डाकटरों से बचें " ये बीमारियों को कैंसर तक पहुंचा देते हैं। बात सही है।  आज विज्ञान भी अंधविश्वाश बनने लगा है हमे अब बंदर की अक्ल  से चलने की जरूरत है। 

3 comments:

Majumdar said...

I hope little Angel is now fit and fine, sir!

Regards

Raju Titus said...

जी हाँ वह अब बिलकुल ठीक है उसकी सेहत में कोई कमजोरी नहीं है। जब हम रासायनिक दवाइयों से शरीर का इलाज करते हैं शरीर अनेक दिनों तक कमजोर रहता है भूख भी मर जाती है मुंह में स्वाद नहीं रहता है। अनेक प्रकार की अन्य बीमारियां लग जाती है। फिर उनका इलाज शुरू हो जाता है।

Anonymous said...

Dear Mr Titus,
I have been practising this "Do nothing cure" for myself and my two children for quite sometime now. However, I do supplement with a little homeopathic medicine which works on the principle of triggering natural immunity and thus can be said to be "natural" too. I am of the firm belief that if we do not interfere with nature, it will cure. I am so glad you practise what you preach!