Saturday, June 20, 2015

फुकूओकाजी कहते हैं मेरी कुदरती खेती को देखिये !

फुकूओकाजी कहते हैं मेरी कुदरती खेती को देखिये !

जुताई , जैविक खाद ,रासायनिक उर्वरक ,कीट एवं खरपतवार नाशकों का उपयोग नहीं।  रोपा लगाना ,कीचड़ मचाना ,पानी भर कर रखने की जरूरत नहीं है। 
कुदरती गेंहूँ की फसल 
मैं मानता हूं कि धान  के पुआल के एक तिनके से  बहुत बड़े बदलाव की शुरुआत  हो सकती है, देखने से यह तिनका छोटा सा और महत्वहीन नजर आता है शायद ही किसी को विश्वास होगा कि वह किसी इंकलाब की शुरुवाद  कर सकता है। लेकिन मुझे इस तिनके के वजन और ताकत  का अहसास हो चुका है। मेरे लिए यह क्रांति  वास्तविक है।
धान की पुआल की धकावन 

जरा सरसों  और गेंहूँ  के इन खेतों को देखिए  इस में पक रही फसल से प्रति चैथाई एकड़ लगभग    एक टन प्रति चौथाई एकड़  (एक किलो प्रति वर्ग  मीटर ) पैदावार ली जा सकेगी। मेरे ख्याल से यह एहिमे प्रिफैक्चर जिले - जो कि जापान के सबसे उर्वरक इलाकों में से है की पैदावार के बराबर है और इन खेतों को पिछले पच्चीस सालों से जोता नहीं गया है।
इनकी बुआई के नाम पर मैं सिर्फ गेंहूँ  और सरसों  के बीजों को रबी  के मौसम में, जबकि धान  की फसल खेतों में खड़ी होती है,  बिखेर देता हूं। कुछ हफ़्तों  बाद मैं धान  की फसल काट लेता हूं और धान  का पुआल सारे खेत में फैला देता हूं।
सरसों (गूगल से लिए गया चित्र )
यही तरीका धान  की बुआई के लिए भी अपनाया जाता है। रबी   की इस फसल को 20 मई के आसपास काट लिया जाएगा। फसल पूरी तरह से पकने के लगभग दो सप्ताह पूर्व मैं धान  के बीजों को सरसों  और गेंहूँ  की फसल पर बिखेर देता हूं।  धान  की कटाई तथा गहाई हो जाने के बाद मैं इसका पुआल भी खेतों में बिखेर देता हूं।
फुकुओका  धान की फसल 
मेरे खयाल से धान  तथा रबी  की फसलों की बुआई के लिए इस एक ही विधि का  उपयोग करना, इस प्रकार की खेती में ही किया जाता है।

 लेकिन एक तरीका इससे भी आसान है। अगले खेत की तरफ चलते हुए मैं आपको बताना चाहूंगा कि वहां उग रहा धान  पिछली रबी   में  गेंहूँ / सरसों  की फसल के साथ ही बोया गया था। इस खेत में बुआई का सारा काम नए साल के पहले दिन तक निपटा लिया गया है।
क्लोवर के साथ पनप रही धान की कुदरती फसल 

इन खेतों में आप यह भी देखेंगे कि वहां सफेद क्लोवर  और खरपतवार भी उग रही है। धान  के पौधें के बीच सफेद क्लोवर  अक्तूबर महीने के प्रारंभ में, यानी गेंहूँ  और सरसों  से कुछ पहले बोई गई थी।
खरपतवार उगने की मैं परवाह नहीं करता क्योंकि उनके बीज अपने आप आसानी से झड़ते और उगते रहते हैं।
अतः इन खेतों में बुआई का क्रम इस प्रकार रहता हैः अक्तूबर के प्रारंभ में सफेद क्लोवर (स्थानीय भूमि ढकाव दलहनी फसल )  धान  के बीच बिखेरी जाती है और जाड़े की फसलों की बुआई वहीं उस महीने के मध्य हो जाती है। नवम्बर की शुरुवाद  में धान  काट लिया जाता है और उसके बाद अगले वर्ष के लिए धान  के बीज बो दिए जाते हैं जो सुप्त अवस्था में वहीं पड़े रहते हैं अपने समय पर उग आते हैं और  सारे खेत में पुआल फैला दिया जाता है। आपको यहां जो सरसों  और गेंहूँ  दिखलाई दे रही है, उसे इसी ढंग से उगाया गया है।
चैथाई एकड़ में खेत में रबी  की फसलों और धान  की खेती का सारा काम केवल एक-दो व्यक्ति ही कुछ ही दिनों में निपटा लेते हैं। मेरे ख्याल से अनाज उगाने का इससे ज्यादा आसान, सरल और बिना लागत का  तरीका कोई अन्य नहीं हो सकता है।
धान की पुआल के नीचे पनपती गेंहूँ और सरसों की फसल 
खेती का यह तरीका आधुनिक  कृषि की तकनीकों के  विपरीत है। यह वैज्ञानिक खेती तथा परम्परागत कृषि तकनीकों  दोनों को बेकार सिद्ध  कर देता है। खेती के इस तरीके  जिसमें  मशीनों ,  मानव निर्मित  खादों तथा रसायनों का उपयोग नहीं होता है।  जबकि पैदावार  औसत जापानी खेतों के बराबर या कई बार उससे भी ज्यादा पैदावार हासिल करना संभव है। इसका प्रमाण यहां आपकी आंखों के सामने  है।

1 comment:

akshay kumar said...

क्या पुआल के निचे फसल सही उग जाती है
खड़ी फसल में दूसरी फसल के बिज उग जाते हें तो क्या वह पावँ के निचे नही आते।।