Sunday, February 24, 2008

मूंग की अंतर फसल

मूंग  की अन्तर फसल

जलवायू परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग 

मूंग वातावरण से नत्रजन खींच कर जमीन में छोड़ देती है जिस से अगली फसल को यूरिया की जरूरत नहीं रहती है। 



मारा पर्यावरण दिनो दिन खराब होता जा रहा है। गम्राति धरति बदलते मौसम की समस्या आज कल एक प्रमुख समस्या के रुप मे हमारे सामने है जिसका सीधा सम्बन्ध हमारी खेती किसानी से है जो हमारा मुख्य आधार है। एक ओर गहरी जुताई और घातक कृषि रासायनो के कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है वहीं इस घाटे वाली खेती के कारण अनेक किसान आत्म हत्या कर रहे हैं।

विगत दिनों संसद मे गर्माति धरति पर बहस हुई किन्तु समाधान हेतु कोई  भी कारगर कदम इस समस्या को कम करने के लिये नहीं उठाया गया इसका हमे खेद है।
मूंग की फसल 

हम दैनिक भास्कर के आभारी हैं जिसने बहुत पहले से हमारे पर्यावरण को बचाने के लिये बिना जुताई की खेती के महत्व को समझ कर उसे अखबार मे स्थान देना शुरु कर दिया था। आज यही एक मात्र ऐसा उपाय है जिस पर अमेरिका जैसे सम्पन्न देश  ने सबसे अधिक घ्यान दिया है और जिसके उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त हुए हैं ।

वे इसे नो - कन्जरवेटिव फार्मिंग कहते हैं।

जैसा कि विदित है हम पिछले  तीस बरसो से इस खेती को अमल मे लाते हुए इसके प्रचार मे संलग्न हैं। अखबार मे पढ़ कर अनेक किसान और सामाजिक संगठन इस खेती की जानकारी हेतु हमारे फार्म पर आते हैं।
मूंग की जड़ें  जिनमे ryzobium रहते है
जो कुदरती यूरिया बनाते हैं। 

मूंग के बीज 
 आजकल गेहूं की फसल मे आखरी पानी चल रहा ह। वे इसमे असानी से अंतरुफसल (इन्टरक्राप) के रुप मे मूंग की फसल ले सकते है। इसमे गर्मी की मूंग के बीजों को खड़ी गेंहूं फसल में छिड़क दे और  जब वह उग आये तो आराम से उगती मूगं के उपर से हंसिये से गेहूं कटाई कर लेंवे। इससे उगती मूंग के नन्हे पौधों पर पांव पड़ने से कोई नुकसान नहीं होता है। इससे अनेक फायदे हैं। प्रथम मूंग सबसे अधिक आर्थिक लाभ देती है। गेहूं की नरवाई जलने से बच जाती है वह सड़कर अगली फसल के जैविक खाद का इन्तजाम कर देती है। मूंग दलहन हाने के कारण खेतों को कुदरति यूरिया प्रदान करती है।

जुताई, खाद और विषैली दवाओ का उपयोग नही करने से एक ओर जहां कार्बन का उत्सर्जन  रुकता है वहीं कुदरति मूंग की फसल मिलती है जिसकी बाजार मे रासायनिक मूंग की तुलना मे आठ गुना कीमत है। इसे कहते हैं “हर्रा लगे न फिटकरी और रंगचोखा होय!"


3 comments:

devesh shandilya said...

sir
kya is tarike ki moong ki kheti chane ki fasal k sath bhi sambhav hain.

Unknown said...

Kya is moong ki fasal ko bechne ka koi visesh sthan he....?

Nayan Goswami said...

Kya is moong ki fasal ko bechne ka koi visesh sthan he....?