Saturday, January 16, 2016

सुबबूल के पेड़ों ने किया कमाल

सुबबूल के पेड़ों के नीचे पनपती गेंहूँ की फसल 

सुबबूल के पेड़ों ने किया कमाल 


मोटे अनाजों की खेती में नत्रजन के महत्व को नहीं नकारा जा सकता है।  यह कुदरती ,रासायनिक या जैविक रूप में अनाजों की फसलों में उपलब्ध कराई जाती है।

कुदरती तौर  पर यह दलहनी पौधों या पेड़ो से मिलती है। दलहनी पेड़ पौधे अपनी छाया  के छेत्र में लगातार नत्रजन देने का काम  करते हैं। रासायनिक खेती में सामान्यत: नत्रजन यूरिया के द्वारा दी जाती है। जैविक खेती में इसे गोबर या गोमूत्र से बनी खाद के द्वारा पूरा किया जाता है।

असल में यह धारणा है की जो भी फसल हम बोते हैं वह नत्रजन को खा लेती है इसलिए नत्रजन जरूरी है।  किन्तु यह भ्रान्ति है  कुदरत में कोई भी पौधा ऐसा नहीं है जो खाद को खाता है हर पौधा खाद बनाता है। फिर यह सवाल उठना लाज़मी है की नत्रजन की कमी क्यों हो जाती है ? नत्रजन की कमी के दो मूल कारण हैं पहला जमीन की जुताई है जिस से नत्रजन गैस बन कर उड़ जाती है जो ग्रीन हॉउस गैस के रूप में हमारे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाती है।

दूसरा जमीन की कुदरती नत्रजन जिसे दलहन जाती के पौधे फिक्स करते हैं या जिसे जैविक खादों के माध्यम से दिया जाता है वह रासायनिक नत्रजन के  डालते ही मिन्टो में गैस बन कर उड़ जाती है। रासायनिक नत्रजन जमीन की कुदरती और जैविक दोनों किस्म की नत्रजन को उड़ा देती है।

हम पिछले ३० सालो से  बिना जुताई की कुदरती खेती का अभ्यास कर रहे हैं। शुरू के अनेक साल हम इस कुदरते नत्रजन के चक्र को नहीं समझ पाये थे इस लिए हमे गेंहूँ और चावल की खेती को करने में मुश्किल हो रही थी। किन्तु हमारी इस समस्या को सुबबूल के पेड़ों ने हल कर दिया।

1988 जनवरी में जापान के जगप्रसिद्ध  कृषि वैज्ञानिक श्री मस्नोबू फुकूओकाजी हमारे फार्म पर पधारे थे उन्होंने हमे नत्रजन से संबंधित उपरोक्त जानकारी को उपलब्ध कराया था उन दिनों हम सुबबूल के पेड़ों को काट दिया करते थे उन्होंने हमे बताया की ये जमीन से जितना ऊपर रहते हैं अपने छेत्र में नत्रजन देने का काम करते हैं।

तब से हम सुबबूल के पेड़ों को देवता समझ कर बचाने लगे है इनके नीचे हम आसानी से गेंहूँ के बीजों को छिड़क कर आसपास के सर्वोत्तम वैज्ञानिक खेतों  बराबर पैदावार ले लेते हैं।  हमे इन से  अतिरिक्त लाभ चारे और लकड़ियों के रूप में हो जाता है। पर्यावरण का  लाभ  भी बहुत है।

सुबबूल के पेड़ की पत्तियों में हाई प्रोटीन रहता है जिसको खाकर हमारे पशुओं को कोई भी अतिरिक्त दाना  देने की जरूरत नहीं रहती है। इनसे बहुत बड़ी मात्रा  में लकड़ियाँ मिलती है जो हमारे फार्म की आमदनी में बहुत सहायक हैं।  

5 comments:

Sunita Narayan said...

Please upload picture of subabul leaves and trees.

RAJENDRA SINGH RATLAM WALA said...

धन्यवाद, आपके द्वारा जो लाभदायक व् ज्ञानवर्धक जानकारी दी जा रही है, मुझे एस लगता है ली में अपनी सर्विस छोड़कर आपके मार्गदर्शन में प्राकर्तिक खेती शुरू करु.

Raju Titus said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

Assam may subabul piar laga sakti hie






ashad ullah said...

Assam may subabul piar laga sakti hie