Monday, January 4, 2016

फलदार पेड़ों की कुदरती खेती


फलदार पेड़ों की कुदरती खेती 

ब से अनाज की वैज्ञानिक खेती में घाटे  की समस्या निर्मित हुई है तब से बहुत किसान फलदार पेड़ों की खेती की ओर  अग्रसर हुए हैं। किन्तु  फलदार पेड़ों में भी वैज्ञानिक खेती अनाजों की खेती की तरह फेल होने  लगी है।  महाराष्ट्र में  संतरों का बहुत बुरा हाल है।  किसान बड़ी महनत  से पेड़ लगाते  हैं किन्तु जब पेड़ फलने  पर आते हैं वो सूखने लगते हैं।
मोसम्बी का कुदरती बगीचा 
इस से किसानो को बहुत निराशा होती है। किन्तु हमने यह पाया है जब किसान फलदार पेड़ों की देखभाल कुदरती तरीके से करते हैं तो हर साल बढ़ते क्रम में फल मिलते हैं उनकी गुणवत्ता और स्वाद में हर साल इजाफा होता है। जिस से अच्छी आमदनी मिलती है।

1988 जनवरी में ऋषि खेती के जनक श्री फुकूओकाजी जब हमारे फार्म पर पधारे थे बता रहे थे की उनका  मोसम्बी का एक एक फल 200 रु. में बिक रहा था।  उनके फलों की यह कीमत उसके स्वाद और जायके के कारण थी। वे अपने फलदार बगीचे में जुताई ,खाद और दवाई का इस्तमाल बिलकुल भी नहीं करते रहे हैं। वे फलदार पेड़ों की शाखाओं की ,छटाई बिलकुल नहीं करते हैं, उनका कहना है की शाखाओं की छटाई करने से पेड़ कमजोर हो जाते है।

कुदरती फलों के बगीचे में अनेक किसान जमीन की जुताई करते रहते है इस से बरसात का पानी जमीन के अंदर नहीं जाता है इसलिए पानी की कमी के कारण भी पड़े सूख जाते है। फलदार पेड़ों के बीच हरयाली का ढकाव होना बहुत जरूरी है इस से अनेक जीव जंतु ,कीड़े मकोड़े ,सूख्स्म जीवाणु रहते हैं  जो लगातार पोषक तत्वों को बनाते हैं ,नमी को संरक्षित रखते हैं जिस से फलदार पेड़ बहुत खुश रहते हैं। वे हर साल बढ़ते क्रम में फल देते हैं।

जब हम अपने बगीचे में जुताई नहीं करते हैं और हरियाली  के ढकाव को साल भर बचाते हैं तो पूरा बगीचा केंचुओं से भर जाता है केंचुओं के घर जमीन में बहुत नीचे गहराई तक रहते हैं जो पानी ,हवा और पोषक तत्वों को जमीन में गहराई तक सप्लाई करने का काम करते हैं।

दीमक भी केंचुओं की तरह बहुत लाभप्रद जीव है यह सूखे अवशेषों को बहुत तेजी से जैविक खाद में बदल देती है किन्तु यदि हम बगीचे में अधिक साफ़ सफाई करते हैं और दीमक को कुछ खाने नहीं मिलता है तो पेड़ों को नुक्सान होता है।

फलदार पेड़ों की कुदरती देखभाल करने में कुछ करने के बदले कुछ नहीं करने की जरूरत रहती है। हम अपने बगीचे में फलदार पेड़ों के बीच में अनाज  और सब्जियों को खेती करते हैं उसमे हम बीजों को जमीन पर बिखरा कर तमाम भूमि ढकाव की वनस्पतियों को जहाँ का तहां काटकर बिछा देते हैं। फसले  उगकर कटे हुए ढकाव के ऊपर छा  जाती है।  इस से दोहरा लाभ मिलता है। दोनों फल के पेड़ और अन्य फसलें एक दुसरे के पूरक रहते हैं।

हम फलदार पेड़ों के साथ सुबबूल भी लगाते हैं ये पेड़ एक और जहाँ बगीचे को गर्म और ठंडी हवा से बचाते  हैं वहीँ पेड़ों को हानिकारक कीड़ों से भी बचाते है दलहन जाती के होने के कारण लगातार नत्रजन सप्लाई करने का भी काम करते हैं।  बरसात को आकर्षित करते हैं जल का प्रबंधन करते हैं।



2 comments:

Vasudev Gaikwad said...

excellent Rajuji has done great work

Jayesh Ramjibhai Ladani said...

It's logical.