Saturday, October 24, 2015

दीमक दोस्त है उसे नहीं मारें !

 दीमक दोस्त है उसे नहीं मारें !

ज हमारे  मित्र जो अनार आदि की बागवानी करते हैं उनका फ़ोन आया वे पूछ रहे थे की हमारे बगीचे में दीमक का प्रकोप हो रहा है क्या करें ?

मेने उन्हें बताया की दीमक एक केंचुओं की तरह एक लाभ प्रद कीट है वह सूखे कचरे जैसे पत्तियां ,टहनियां ,पुआल ,नरवाई आदि को जैविक खाद में बदल देता है। जब हम बगीचे में नींदों को मारने के लिए जुताई करते हैं और निंदाई  गुड़ाई करते रहते है तब बगीचे में सूखे कचरों की कमी हो जाती है इसलिए दीमक हमारे हरे भरे पेड़ों की सूखी छाल को खाने लगती है।  यदि हम अपने बगीचे में जुताई ,निंदाई ,गुड़ाई नहीं करते है और कचरों को जहाँ का तहाँ सड़ने देते हैं तो यह दीमक का आहार रहता है दीमक पेड़ों से उत्तर कर इस कचरों को खाने लगती है तथा उसे बेहतरीन जैविक खाद में बदल देती है।

ऋषि खेती करने से पहले हमारे बगीचे में भी दीमक का बहुत प्रकोप था हमारे  घर का फर्नीचर खिड़की दरवाजे ,किताबे सब में दीमक लग जाती थी किन्तु अब हमे ढूंढने से भी दीमक नहीं मिलती है। इसलिए हमारी सलाह है की दीमक ना मरे वरन उसे बचाये जिस से बगीचा जैविकता से भर जायेगा  हो जायेगा। 

6 comments:

Inder preet singh said...

सर बहुत बढ़िया जानकारी। दिक्कत ये है की इस किस्म की जानकारी की कमी है। सर मेरी बगीची में आम का पेड़ है उसके पत्ते सब्जी की क्यारी में गिरते रहते हैं । फिर वहां चीटियां आ जाती हैं।क्या ये नुकसान तो नहीं करेंगी

Inder preet singh said...

सर बहुत बढ़िया जानकारी। दिक्कत ये है की इस किस्म की जानकारी की कमी है। सर मेरी बगीची में आम का पेड़ है उसके पत्ते सब्जी की क्यारी में गिरते रहते हैं । फिर वहां चीटियां आ जाती हैं।क्या ये नुकसान तो नहीं करेंगी

dnpandey.raeo said...

इन्दर जी चीटिया भी हमारी मित्र हे ये शाकाहारी नही मांसाहारी होती हे ।माहु आदि छोटे किट व् मृत कीटो को खाती हे।इन्हें न मारे।।प्राकृतिक खेती में हम इनको मारकर शत्रुता करकर नही इनके साथ रहकर खेती करते हे।

dnpandey.raeo said...

इन्दर जी चीटिया भी हमारी मित्र हे ये शाकाहारी नही मांसाहारी होती हे ।माहु आदि छोटे किट व् मृत कीटो को खाती हे।इन्हें न मारे।।प्राकृतिक खेती में हम इनको मारकर शत्रुता करकर नही इनके साथ रहकर खेती करते हे।

dnpandey.raeo said...
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dnpandey.raeo said...

इन्दर जी चीटिया भी हमारी मित्र हे ये शाकाहारी नही मांसाहारी होती हे ।माहु आदि छोटे किट व् मृत कीटो को खाती हे।इन्हें न मारे।।प्राकृतिक खेती में हम इनको मारकर शत्रुता करकर नही इनके साथ रहकर खेती करते हे।